Tuesday, July 9, 2019

Kya Sapana Chaudhary ke BJP mein sadasyata le lene se Badalegi Bhajapa Netaon ki soch?

सपना चौधरी- हरियाणा के खुले मंचों पर सबसे ज्यादा पसंद की जाने वाली कलाकारों में से एक हैं। लेकिन पिछले कुछ महीनों में इनकी चर्चा सियासत के मैदानों में अधिक हुई है। लोकसभा चुनावों से पहले अटकले आई की सपना कांग्रेस में शामिल हो सकती हैं, इसके बाद भाजपा नेता अश्विनी कुमार चोपड़ा और सुरेंद्र सिंह ने उनका परिचय दिया था। 

अश्विनी कुमार चोपड़ा ने सपना चौधरी को ठुमके लगाने वाली कहा था और भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह ने उनके काम पर सवाल खड़े कर कहा कि उनका पेशा नाचना, गाना है।उन्होंने राहुल गांधी को संबोधित करते हुए कहा कि जैसे आप के पिता स्वर्गीय राजीव गांधी ने सोनिया गांधी को अपना बना लिया, वैसे ही आप भी डांसर सपना चौधरी को अपना बना लें।



पर अब जब वही सपना चौधरी भाजपा के देशव्यापी सदस्यता अभियान से जुड़ने वाली पहली सदस्य हैं तो सब मौन हैं।किसी भी नेता को उनसे कोई शिकायत नहीं।यहाँ सवाल भाजपा नेताओं से है कि क्या अब भी उन्हें सपना चौधरी के नाचने गाने से दिक्कत है ? या केवल क्या भाजपा में सदस्यता ले लेने से सपना को लेकर भाजपा नेताओं की सोच बदल गई है ?

source: https://www.molitics.in/news/122033/sapana-chaudhary-entry-in-bjp

Friday, July 5, 2019

kya sudheer chaudhary ka dna farzi hai?

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा द्वारा सदन में दिए भाषण को ज़ी न्यूज़ के संपादक सुधीर चौधरी ने कॉपी-पेस्ट बताते हुए कहा कि सांसद ने अमरीकी पत्रकार मार्टिन लांगमैन के एक लेख से चुराया है, जिसके बाद मार्टिन ने खुद ट्वीट कर सुधीर चौधरी के आरोपों को ख़ारिज कर दिया। अब इस फ़जीहत पर न तो चौधरी ने माफ़ी मांगी और न चैनल ने। फेसबुक ने भी चैधरी के डीएनए कार्यक्रम को फ़र्ज़ी ख़बर का तमगा दे दिया है।




Source link: https://www.molitics.in/news/121351/Is-Sudhir-Chaudhary's-DNA-falsely-


How did the first lady presenting the Nirmala Sitharaman budget, when Indira Gandhi introduced in 1970?

तारीख थी 28 फरवरी, 1970 की, जब पहली बार किसी महिला ने देश का बजट पेश किया था. इस बजट पर सबकी निगाहें थीं, क्योंकि ये चुनावी बजट होने वाला था. 1971 के मार्च में आम चुनाव होने थे और ऐसे में इंदिरा गांधी सरकार का ये आखिरी बजट था. इसी बजट में इंदिरा गांधी ने वो चर्चित नारा दिया था गरीबी हटाओ, जिसके बाद 1971 में इंदिरा गांधी को आम चुनाव में जीत मिली थी.
चुनावी बजट होने के बावजूद इंदिरा गांधी ने कुछ कड़े फैसले लिए थे. बजट 15 पन्नों का था. # डायरेक्ट और इनडायरेक्ट टैक्स बढ़ाया गया था. प्रॉपर्टी टैक्स बढ़ा था, इम्पोर्ट ड्यूटी भी बढ़ाई गई थी.
# इन्कम टैक्स बढ़ाया गया था. 40 हजार रुपये सालाना की आमदनी से ऊपर इन्कम टैक्स लगाया गया था.
# सामान्य वेल्थ टैक्स में बढ़ोतरी की गई थी.

# टीवी पर ड्यूटी बढ़ाई गई थी. 20 पर्सेंट लेवी लगा दी गई थी.
# सैलरी वाले लोगों से हर महीने 250 रुपये की कटौती तय की गई थी, जो पहले 5 रुपये ही थी.
# सिगरेट पर ड्यूटी 3 फीसदी से बढ़ाकर 22 फीसदी कर दी गई थी. लेकिन इस दौरान एक बात का ध्यान रखना ज़रूरी है. वो दौर 1970 का था और अब 2019 चल रहा है. बहुत सी चीजें बदल गई हैं. देश में आर्थिक उदारीकरण है और इस लिहाज से निर्मला सीतारमण की तुलना इंदिरा से करना किसी भी हाल में ठीक नहीं होगा.

source:  https://www.molitics.in/news/121278/nirmala-sitharaman-first-women-present-budget

Thursday, July 4, 2019

Does the budget of BMC be spent on Matoshree's writing?

मुंबई में भीषण बारिश के चलते जल-जीवन अस्त-व्यस्त होगया। कई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 35-40 लोगों की मारे जाने की बात सामने आरही है। शिवसेना मुखपत्र ने अपने लेख में कहा कि जब भी ऐसा होता है, तब शिवसेना की आलोचना करना फैशन हो जाता है।

एशिया की सबसे अमीर महानगर पालिका का 30000 करोड़ का बजट क्या मातोश्री की लिपाई-पोताई पर ख़र्च होता है?




    

source link: https://www.molitics.in/news/121114/mumbai-monsoon-heavily-rains

Wednesday, July 3, 2019

113 story of Muslim children to be taken off the train

113 मुस्लिम बच्चों को ट्रेन से नीचे उतारने की कहानी

113 मुस्लिम बच्चों को ट्रेन से नीचे उतारने की कहानी... ऐसे कई तरह के सवाल लोग सोशल मीडिया के जरिए जिम्मेदारों से पूछ रहे हैं.

अचानक ऐसे सवालों की बाड़ सोशल मीडिया पर कैसे आ गयी दरसल मालदा टाउन-आनंद विहार एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे लगभग 113 मदरसा छात्रों को शनिवार को संदेह के आधार पर बरेली रेलवे स्टेशन पर उतार लिया गया. जिसके बाद लोगों ने अपना गुस्सा शासन-प्रशासन के खिलाफ सोशल मिडिया पर कड़े शब्दों में सवालों के भंडार से जाहिर किया.


असल में छात्रों को क्यों ट्रेन से उतरा गया प्रशसन की माने तो, आनंद बिहार-मालदा टाउन वीकली ट्रेन में संदिग्ध बच्चों के होने की सूचना मिली थी। सूचना पर बच्चों को आरपीएफ और जीआरपी द्वारा स्टेशन पर उतारा गया। पूछताछ में पता चला है कि ये बच्चे अलग अलग मदरसों के है जो छुट्टी के बाद वापस जा रहे थे।

इनके नाम पता की तस्दीक की जा रही है। बच्चे दिल्ली, हापुड़, अमरोहा और मुरादाबाद के मदरसे के हैं। वहीँ बच्चों को ले जा रहे अंसार का कहना है कि ये सब बच्चे अलग अलग मदरसों के है और वापस मदरसे जा रहे हैं। पुलिस ने किसी समुदाय को जबरन परेशान या उनके खिलाफ सकती के बात से इंकार किया है

source link: https://www.molitics.in/news/120939/uttar-pradesh-madarsa-students-deboarded-from-train-at-railway-station

Monday, July 1, 2019

Meerut Migration: Another attempt to emanate the color of communalism

मेरठ में हिन्दू परिवार पलायन कर रहे हैं. 425 परिवारों में से लगभग 125 परिवार अपना मकान बेचकर पलायन कर चुके है। मुद्दा ज़रा गंभीर नज़र आया, पडताल की तो पता चला कि ये किस्सा है मेरठ शहर के बीच स्थित लिसाड़ी गेट थाना क्षेत्र के प्रहलाद नगर का जहाँ के रहने वाले दूसरे समुदाय के लोगों को कम दाम पर मकान बेचकर दूसरी किसी जगह पर जा रहे हैं। 




यहां कई मकानों व प्लाट के गेटों पर अभी भी बिकाऊ लिखा हुआ है।और इनमें से अधिकांश मकानों की खरीद-बिक्री बीते पांच-छह वर्ष के भीतर हुई है। इस घटना को स्थानीय भाजपा नेता व बूथ अध्यक्ष भवेश मेहता ने सांप्रदायिक रंगों में रंग दिया। आँख और मुँह बंद किए भोले-बाले लोग नेताओं के इस जाल में फँस भी रहे हैं। लेकिन ज़रूरी है भवेश मेहता जैसे नफ़रत के व्यापारियों की पहचान और सामाजिक रूप से उनका उचित विरोध।
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